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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016
विषर्जन : तेतरी दुर्गा मंदिर से LIVE (11-10-16)
सोमवार, 10 अक्टूबर 2016
नवरात्री विशेष (10/11) : बिहार के अनुपम मंदिरों में से एक हैं तेतरी का दुर्गा मंदिर
रविवार, 9 अक्टूबर 2016
नौवें दिन हवन की विधि और उससे चमतकारी लाभ से धन यश की वृद्धि : डॉ रजनीकान्तदेव
नौवें दिन की दुर्गा सिद्धिदात्री हैं। यह दिन मां सिद्धिदात्री दुर्गा की पूजा के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। मां भगवती ने नौवें दिन देवताओं और भक्तो के सभी वांछित मनोरथों को सिद्ध कर दिया, जिससे मां सिद्धिदात्री के रूप में सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हुई।
परम करूणामयी सिद्धिदात्री की अर्चना व पूजा से भक्तों के सभी कार्य सिद्ध होते हैं। बाधाएं समाप्त होती हैं एवं सुख व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार अष्टमी को विविध प्रकार से भगवती जगदम्बा का पूजन कर रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए तथा नवमी को विविध प्रकार से पूजा-हवन कर नौ कन्याओं को भोजन खिलाना चाहिए और हलुआ आदि प्रसाद वितरित करना चाहिए और पूजन हवन की पूर्णाहुति कर दशमी तिथि को व्रती को व्रत खोलना (पारण करना) चाहिए।
*हवन की विधि एवं उससे लाभ:-*
दुर्गा सप्तशती में बताया गया है कि मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए किस प्रकार से हवन करना चाहिए। हवन के समय लक्ष्मी, ऐश्वर्य और धन संबंधी इच्छा की पूर्ति के लिए पीले रंग के आसन का प्रयोग करें। वशीकरण, उच्चाटन आदि के लिए काले रंग के आसन का प्रयोग करें। बल, शक्ति आदि प्रयोगों के लिए लाल रंग का आसन प्रयोग करें। जबकि सात्विक साधनाओं आदि प्रयोगों के लिए कुश के बने आसन का प्रयोग करें। धन संबंधी प्रयोगों में आप पीले वस्त्रों का ही प्रयोग करें। यदि पीले वस्त्र न हों, तो मात्र धोती पहन लें और ऊपर से शाल लपेट लें। आप चाहें, तो धोती को केसर के पानी में भिगोकर पीला भी रंग सकते हैं।
जायफल से हवन करने से कीर्ति की प्राप्ति होती है। किशमिश से कार्य की सिद्धि होती है। आंवले से सुख और केले से आभूषण की प्राप्ति होती है। इस प्रकार फलों से अर्घ्य देकर यथाविधि हवन करें। खांड, घी, गेंहू, शहद, जौ, तिल, बिल्वपत्र, नारियल, किशमिश और कदंब से हवन करें। गेहूं से होम करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। खीर से परिवार-वृद्धि, चंपा के पुष्पों से धन और सुख की प्राप्ति होती है। आंवले से कीर्ति और केले से पुत्र प्राप्ति होती है। कमल से राज सम्मान और किशमिश से सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है। खांड, घी, नारियल, शहद, जौ, तिल तथा फलों से होम करने से मनवांछित वस्तु की प्राप्ति होती है।
*व्रत करने वाला मनुष्य इस विधान से होम कर आचार्य को अत्यंत नम्रता के साथ प्रणाम करें और यज्ञ की सिद्धि के लिए उन्हें दक्षिणा दें। इस महाव्रत को पहले बताई हुई विधि के अनुसार जो कोई करता है, उसके सब मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। नवरात्र व्रत और हवन करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।*
इस दौरान 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र शीघ्र विवाह देने वाला माना जाता है। धन-लाभ के लिए स्फटिक की माला पर 'क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का जाप करें। परेशानियों के अंत के लिए 'ओम ऐं ह्यीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का जाप करना चाहिए।
*हवन के उपरांत साधक जानकारी के अभाव में स्वेच्छानुसार आरती उतार लेते हैं, जबकि देवताओं के सम्मुख चौदह बार आरती उतारने का विधान है। चार बार चरणों पर से, दो बार नाभि पर से, एक बार मुख पर से और सात बार पूरे शरीर पर से। इस प्रकार चौदह बार आरती की जाती है। जहाँ तक हो सके विषम संख्या अर्थात 1, 5, 7 की संख्या में बत्तियां बनाकर ही आरती की जानी चाहिए। इस प्रकार विधानपूर्वक मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए किया गया हवन सब प्रकार के रोग-शोक का नाश करता है और साधक को ऐश्वर्य व मोक्ष प्रदान करता है।*
नवरात्रि में कुछ इस तरह जमाये कन्या व साथ में बटुक, पढ़े पूरी विधि।
बारिश : फ़ीका कर दिया बाजार का रौनक ,मेला का रंग ।
आज सुबह से शुरू हुई बारिश ने दुर्गा पूजा की रौनक पर पानी फ़ेर दिया हैं । सुबह से बारिश की हल्की बूंदें अब दोपहर से लगातार हो गयी हैं । जिससे नवगछिया का बाजार क्षेत्र , दुर्गा पूजा के सभी मेला व पंडाल स्थल गर जगह बारिश ने कीचड़मय कर दिया हैं । बारिश ने जहाँ आज अष्ठमी के दिन ही दुकानदारों के चेहरें पर चिंता की लकीरें बिलकुल साफ़- साफ़ दिख रही हैं । मेला के लिए सभी दुकानदारों ने अपने दुकान में सामान भर लिया हैं ।
तो वहीं नवगछिया बाजार के दुकानों में भी भीड़ काफ़ी कम गयी हैं ।
ज्ञात हो की दो वर्ष पहलें भी एक बार दुर्गापूजा में लगातार 4 दिनों तक (अष्ठमी से एकादशी तक ) जम कर बारिश हुई थी जिससे जन-जीवन के साथ साथ मेला परिसर में जलमग्न हो गया था, मेला दुकानदार को खून के आंशु रोना पड़ा था ।
बारिश की तस्वीर राय बाबा मंदिर की हैं ।
शनिवार, 8 अक्टूबर 2016
नवगछिया की पूर्व भाजपा नेत्री व मशहूर महिला चिकित्सक को नम आँखों से किया विदा |
नवगछिया अनुमंडल की मशहूर महिला डॉक्टर सह पूर्व भाजपा नेत्री डॉ विमला राय दीदी को आज नवगछिया वासियों ने नम आखों से विदा कर दिया |
ज्ञात हो की विमला दीदी का निधन लम्बें इलाज के दौरान गुरुवार रात्रि दिल्ली पानीपत में हुआ था , जिनका पार्थिक शरीर आज शनिवार दोपहर उनकें निज आवास नवगछिया लाया गया तत्पश्चात उनकें पार्थिक शरीर को अंतिम संस्कार हेतु बरारी घाट ले जाया गया | मौके पर भाजपा के कई नेता व नवगछिया के कई समाजसेवी व बुद्धिजीवी लोग उपस्थित थे |
GS का नवरात्री पोस्ट (8/11) : पकरा आचार्य टोला दुर्गा मंदिर ।
यूँ तो कहतें हैं कि माँ की ममता के आगे दुनिया की सभी सुख,मोह नगण्य हैं । इसलिए आज नवरात्रि पूजा के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि रूप के चरणों में अपना शीश झुकानें चलतें हैं पकरा के आचार्य टोला में स्थापित दुर्गा मंदिर ।
नौगछिया - लक्ष्मीपुर सड़क के बीच एक महोल्ला स्थित हैं जिसे आचार्य टोला पकरा के नाम से जाना जाता हैं । टोला में लगभग 100 ब्राह्मण परिवार एक साथ रहतें हैं इन्हीं के परिवार के आंगन में माँ जगत जननी दुर्गा का मंदिर हैं । मंदिर का निर्माण आज से 200 वर्ष पहले मदन बाबु आचार्य के द्वारा किया गया था। मंदिर में पारिवारिक लोगों के द्वारा पूजा अर्चना की जाती हैं । मंदिर के नवनीकरण स्वo अवधेश आचार्य ( गोसाईं गाँव के मास्टर साहब ) के सौजन्य से किया गया था ।
मैया के इस दरबार में कई तरह के तथ्य जुडें हैं । यहाँ मैया की प्रतिमा विराजमान हैं । कलश व जयंती बिठाई जाती हैं । नवाह पाठ परिवार के लगभग सभी मर्द जन करतें हैं । महिलाओं द्वारा हर संध्या भक्ति भजन गीत संगीत होता हैं । हर दिन पूजा के बाद ब्राह्मण व कन्या कुमारी को भोजन कराया जाता हैं । प्रत्येक संध्या यहाँ महाआरती होती हैं । जिसमें परिवार के लगभग सैकड़ों लोग उपस्थित होते हैं । आज मंदिर में काफ़ी धूम हैं । सप्तमी पूजा में आज रात्रि झींगे की निशाबलि (कुष्मांडबलि ) दी जाती हैं । छागर की बलि यहाँ पूर्णतया वर्जित हैं । परिवार जनों ने बताया कि मैया बहुत ही शक्तिशाली हैं । किसी भी विपदा में मैया भगवती तुरंत बेडा पार लगाती हैं । इसलिए हर साल परिवार के सभी जन चाहे वो भारत के किसी भी कोनें में हो दुर्गापूजा में पैतृक घर जरूर आते हैं ।
वर्तमान में मंदिर के पंडित अखिलेश आचार्य व मंदिर में पुजारी के रूप में रंजन आचार्य हैं । परिवार के बिपिन बिहारी आचार्य , उग्रमोहन आचार्य , अवधेश आचार्य , तपेश आचार्य,डॉo मुरलीधर आचार्य , राजेंद्र आचार्य , कृष्णानंद आचार्य के द्वारा पूजन धूमधाम से हो रहा हैं ।
मंदिर के व्यवस्थापक उग्रमोहन आचार्य ने बताया कि यहाँ दशमी के दिन गाजे - बाजे ,ढोल -नगाड़े के साथ कलश का विषर्जन लक्ष्मीपुर गंगा घाट पर किया जाता हैं ।
पूरे दस दिनों तक परिवार का माहौल पूर्णतया भक्तिमय रहता हैं ।
रचना :
बरुण बाबुल ।
शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016
नवरात्रि विशेष : कन्या भोजन के जुठल पत्तों से करें व्रत की समाप्ति मिलेगा यश , होगी धन की प्राप्ति ।
Gs:
नवरात्री का व्रत या अष्ठमी का व्रत आप अगर कर रहें हैं तो आपके लिए एक विशेष जानकारी हैं कि आप अपना व्रत घर में भोजन कराये कन्या कुमारी के जुठल पत्तों से ही व्रत तोड़े । कुछ भी खानें से पहले मैया को आराधना कर कन्या कुमारी के जुठल प्रसाद से अपना व्रत तोड़ें ।
शास्त्रों में ही नवरात्री कन्या भोजन का कई महत्त्व हैं ।।
राशि के अनुसार मंत्र से करे इस नवरात्रि में सुख,समृद्धि,धन,यश की वृद्धि ।
इन मंत्रों का कोई विशेष विधान नहीं है लेकिन सामान्य सहज भाव से स्नान के पश्चात अपने पूजा घर या घर में शुद्ध स्थान का चयन कर प्रतिदिन धूप-दीप के पश्चात ऊन या कुशासन पर बैठें एवं अपनी शक्ति अनुरूप एक, तीन या पांच माला का जाप करें। निश्चित ही इसका प्रभाव होगा, जिससे धन, यश और समृद्धि की वृद्धि होगी।
किसी भी कार्य के लिये घर से निकलने से पूर्व, अपनी राशि के अनुसार मंत्र का २१-बार जप करने के बाद ही घर से निकलें। मंत्र के प्रभाव से कार्य में आने वाली बाधाएं समाप्त होंगी तथा सफलता के योग बनेंगे। साथ ही जो लोग आपकी राह में बाधा उत्पन्न करते हैं वह भी कमजोर हो जाते हैं। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार अचूक दिव्य मंत्र-
मेष --चू चे चो ला ली लू ले लो अ.....ॐ ऐं क्लीं सो:
वृषभ --इ उ ए ओ वा वी वू वे वो......ॐ ऐं क्लीं श्रीं
मिथुन --का की कू घ ङ छ के को.....ॐ ओम क्लीं ऐं सो:
कर्क --ही हू हे हो डा डी डू डे डो......ॐ ऐं क्लीं श्रीं
सिंह --मा मी मू मे मो टा टी टू टे.......ॐ ह्रीं श्रीं सो:
कन्या --टो पा पी पू ष ण ठ पे पो.......ॐ क्लीं ऐं सो:
तुला --रा री रू रे रो ता ती तू ते......ॐ ऐं क्लीं श्रीं
वृश्चिक --तो ना नी नू ने नो या यी यू......ॐ ऐं क्लीं सो:
धनु --ये यो भा भी भू धा फा ढा भे......ॐ ह्रीं क्लीं सो:
मकर --भो जा जी खी खू खे खो गा ग......ॐ ऐं क्लीं श्रीं
कुंभ --गू गे गो सा सी सू से सौ दा.....ॐ ऐं क्लीं श्रीं
मीन --दी दू थ झ ञ दे दो चा ची......ॐ ह्रीं क्लीं सो:
साभार :
डॉ रजनीकांत देव

















