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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

बिहार में बाढ़ से प्रभावित 6 लाख से अधिक परिवारों को मिलेंगे 6-6 हजार रुपये, सूची तैयार करने के निर्देश GS NEWS


बिहार में कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ते जा रहा है  इसी बीच बिहार में बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है ! बिहार में 10 जिले में करीब 6 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं इसी बीच बिहार सरकार  बाढ़ से प्रभावित  प्रत्येक परिवार को सहायता राशि के तहत 6 हजार 6 हजार रूपया दिए जाएंगे साथ ही, बाढ़ के कारण जिनका कच्चा-पक्का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है या जिनकी फसल बर्बाद हुई है, सरकार उन्हें भी सहायता देगी। 


इसके अलावा पशुओं का नुकसान होने पर भी सरकार सहायता देगी। प्रभावितों को सरकारी सहायता पहुचाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलों को अविलंब सूची तैयार करने के लिए कहा है। 


अभी 10 जिले बाढ़ से प्रभावित 
बिहार में अभी 10 जिले- सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, खगड़िया, पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों में अभी 6.36 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है। इन प्रभावितों को सहायता देने के लिए आपदा प्रबंधन ने लोगों की पहचान कर उनकी सूची बनाने का निर्देश जिलों को दिया है।


विभाग ने कहा है कि बाढ़ग्रस्त इलाके के सभी परिवारों को सहाय्य अनुदान यानी जीआर मद में 6 हजार रुपए दिए जाने हैं। इसके लिए प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए। सूची तैयार करते समय प्रभावितों का नाम-पता के साथ ही बैंक खाता भी लिया जाएगा। प्रभावितों को 6 हजार नकदी सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित होगी ताकि कोई बिचौलिया बीच मे न आये। 


क्षतिग्रस्त मकानों व फसल नुकसान का भी ब्यौरा तैयार करने को कहा 
बाढ़ग्रस्त इलाके में हुए अन्य नुकसान में भी लोगों को सरकार सहायता देगी। फसल क्षति से लेकर मकान व पशु नुकसान में भी सहायता का प्रावधान है। जिलों को कहा गया है कि वह क्षतिग्रस्त मकानों के साथ ही फसल नुकसान का भी ब्यौरा तैयार करें। 


फसल नुकसान का विवरण कृषि विभाग के माध्यम से तैयार होगा। विभाग ने यथासंभव प्रभावितों की सूची बनाने को कहा है ताकि लोगों को जल्द से जल्द सहायता राशि दी जा सके। वहीं बाढ़ में जिनका गाय, भैंस, बकरी से लेकर मुर्गा का भी नुकसान हुआ है तो सरकार उन्हें भी सहायता देगी। कपड़ा और बर्तन के नुकसान होने पर भी सभी परिवारों को सहायता देने का प्रावधान है।


नुकसान होने पर इन मदों में मिलेगी सहायता
6000 नकदी हरेक परिवार को
1800 कपड़ा मद में
2000 बर्तन के लिए
6800 प्रति हेक्टेयर फसल
30 हजार प्रति गाय, भैंस में
3 हजार प्रति बकरी, भेड़, सुअर 
25 हजार प्रति घोड़ा पर
50 रुपये प्रति मुर्गा, अधिकतम 5 हजार
95100 कच्चा-पक्का मकान नुकसान में
5200 पक्का मकान के आंशिक क्षतिग्रस्त में
3200 कच्चा मकान के आंशिक क्षतिग्रस्त में
4100 झोपड़ी के पूर्ण नुकसान होने पर
2100 जानवर के शेड नुकसान मद में

10 जिला
55 प्रखंड
 282 पंचायत
636311 आबादी
1.50 लाख से अधिक परिवार


भागलपुर व मुंगेर दोनों जिले के डीएम को मिला कमिश्नर का प्रभार GS NEWS

भागलपुर में लगातार कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है  बहुत से अफसर इसकी चपेट में आ चुके हैं  आपको बता दें कि भागलपुर की प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किन्नी के चिकित्सा अवकाश में चले जाने के कारण भागलपुर व मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त का प्रभार दोनों जिले के डीएम को सौंपा गया है. भागलपुर के डीएम भागलपुर प्रमंडल के कमिश्नर के प्रभार में रहेंगे और मुंगेर के डीएम मुंगेर प्रमंडल के कमिश्नर के प्रभार में रहेंगे.
वंदना किनी मुंगेर प्रमंडल के प्रभार में थीं, इसी कारण उनके चिकित्सा अवकाश में जाने से मुंगेर के कमिश्नर का पद खाली हो गया था. यह व्यवस्था श्रीमती किनी की अवकाश अवधि तक के लिए की गयी है. इस संदर्भ में बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव कन्हैया लाल साह ने अधिसूचना जारी की.
श्रीमती वंदना किन्नी कोरोना पॉजिटिव हो जाने के बाद अपने भागलपुर स्थित सरकारी आवास पर कोरेंटिन थीं. लेकिन बुधवार को तबीयत बिगड़ जाने पर उन्हें चिकित्सकों ने उच्चस्तरीय संस्थान रेफर कर दिया था. इसके बाद बुधवार शाम को वह पटना एम्स के लिए प्रस्थान की. फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.

बिहार में 50 वर्ष से ज्यादा के अक्षम सरकारी सेवक हटाए जाएंगे, प्रत्येक वर्ष दो दफे समीक्षा GS NEWS


बिहार सरकार के अधीन 50 वर्ष से ज्यादा के अक्षम सरकारी सेवक हटाए जाएंगे। सरकार ने उनके कार्यकलापों की समीक्षा के लिए नीति निर्धारित कर दी है। हर साल दो दफे समीक्षा का काम होगा। सत्यनिष्ठा के साथ कार्य दक्षता और उनके आचार भी देखे जाएंगे। इसमें कहीं कोई कमी पाई जाती है तो अनिवार्य सेवानिवृति दी जाएगी। कार्यकलापों की समीक्षा के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न स्तर पर अलग-अलग समितियों का गठन किया है।

 


सामान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की समीक्षा के लिए बनाई गई नीति को लेकर संकल्प जारी कर दिया। समीक्षा कैसे और किस स्तर पर होगी इसकी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। 50 वर्ष से उपर के समूह क, ख, ग और अवर्गीकृत सभी समूहों के कर्मियों के कार्यकलाप की समीक्षा होगी। हर विभाग में समीक्षा के लिए समिति का गठन भी कर दिया गया है। 


समूह ‘क’ के कर्मियों के लिए अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति यह काम करेगी। वहीं समूह ‘ख’ के मामले में समिति के अध्यक्ष अपर सचिव या संयुक्त सचिव होंगे। समूह ‘ग’ व अवर्गीकृत समूह के कर्मियों के कार्यकलाप की समीक्षा के लिए बनी समिति के अध्यक्ष संयुक्त सचिव रैंक के अफसर होंगे।
 


ऐसा रहा तो दी जाएगी अनिवार्य सेवानिवृति
समिति कुछ खास बिंदुओं पर कर्मचारियों के कार्यकलापों की समीक्षा करेगी। यदि किसी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध होती है तो अन्य दूसरे बिंदुओं पर विचार किए बिना अनिवार्य सेवानिवृति की अनुशंसा की जाएगी। समीक्षा का दूसरा पैमाना कार्य दक्षता या आचार होगा। कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं है जिससे कर्मी को सेवा में बनाए रखना न्याय या लोकहित में नहीं हो तो उन्हें भी अनिवार्य तौर पर सेवानिवृति करने की कार्रवाई होगी। इसके अलावा किसी कर्मी के संबंध में विचार करते वक्त एक मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी को भी संज्ञान में रखने को कहा गया है।


जून व दिसम्बर में होगी समीक्षा 

समिति प्रत्येक वर्ष दो दफे समीक्षा का काम करेगी। जिन कर्मचारियों की उम्र जुलाई से दिसम्बर के बीच 50 वर्ष से ज्यादा होनेवाली है तो उसके मामलों की समीक्षा उसी वर्ष जून में होगी। वहीं, जनवरी से जून के महीने में जिनकी उम्र 50 से उपर होनेवाली है उनके मामलों की समीक्षा इससे पहले ही दिसम्बर में की जाएगी।


20 वर्ष का हुआ विक्रमशीला सेतु , जानिए कैसे समृद्ध हुआ अंग प्रदेश GS NEWS



बीस वर्ष पहले जब विक्रमशिला सेतु का उद्घाटन होने जा रहा था तो लोगों को इस बाद की खुशी थी कि अब यातायात संबंधी मुश्किलों को सामना उनलोगों को नहीं करना पड़ेगा. लेकिन यह खुशी यातायात के मुश्किलों के सामाधान से कहीं अधिक बड़ी थी. क्योंकि इस पुल पर आवागमन की शुरूआत समाज के हर क्षेत्र को बदलकर रख देने वाला था. गंगा इस पार और उस पार का समाज इसी पुल के रास्ते से बड़ी तेज गति से यू टर्न मार कर विकास की लंबी छलांग मारने को तैयार था. 
और ऐसा हुआ भी. 20 वर्ष पहले के बीहर आज शहर की श्रेणी में हैं. कल तक बालू पानी का रोना रोने वाली नवगछिया की धरती सोना उगल रही है. मध्य बिहार से कोसी और सीमांचल का नाता इतना अटूट हुआ कि वक्त और फासले की बात बेमानी हो गयी. आज सेतु पर जब भी हम जाम में फंसते हैं तो इसके संकरे और तंग रास्ते को देख कर तंज कसते हैं लेकिन इस हकीकत को भी हमें स्वीकार करना होगा कि इसी तंग और संकरे रास्ते से होते हुए विकास की बयार ने अंग प्रदेश को और ज्यादा समृद्ध किया है. 
विस्तृत हुआ शहर और कई बाजारों ने लिया आकार 

1990 में दशक में जब विक्रमशिला सेतु निर्माणाधीन था तो लोग अक्सर यह कहा करते थे कि पुल बनने के बाद नवगछिया का व्यवसाय प्रभावित हो जायेगा. समृद्धि भागलपुर में आयेगी. लेकिन लोगों का यह अनुमान गलत था. सेतु बनने के बाद नवगछिया में तीन छोटे बड़े और नये बाजार विस्तृत हो गये. इसमें नवगछिया का जीरो माइल बाजार, जाह्नवी चौक बाजार, हाइलेवल चौक है. विक्रमशिला सेतु पथ पर अब भव्य हॉटल और रेस्टोरेंट देखे जा सकते हैं तो पेट्रोल पंप और लाइन ढ़ाबों से यह गुलजार दिखता है. विक्रमशिला सेतु और नवगछिया में बीच में आने वाले गांवों की महत्ता और ज्यादा बढ़ गयी है. इन गांवों में जमीन के भाव आसमान छू रहे हैं. इसका कारण यह है कि इन गांवों की जमीन सभी प्रकार के व्यवसाय के लिए फिट है. 
खुल गये रोजगार के नये अवसर 

विक्रमशिला सेतु बनने के बाद रोजगार के कई नये रास्ते खुल गये. नवगछिया के गंगा कोसी का किनारा सब्जी और दुग्ध उत्पादक क्षेत्र के रूप में जाना जाता था. लेकिन बीस वर्ष पहले यहां के लोगों के लिए स्थानीय बाजार ही एक मात्र विकल्प था. सेतु पर आवागमन चालू होने के बाद सब्जियां, फल और दूध सीधे भागलपुर पहुंचने लगे. 20 वर्ष पहले दूध को व्यवसायिक नहीं माना जाता था. लेकिन आज प्रत्येक गांव में दुग्ध संग्रहण केंद्र है और दूध का बाजार व्यापक हो चुका है. बड़े छोटे सभी प्रकार के व्यवसायी इस तरह के व्यवसाय से जुड़े हैं. 
स्वस्थ्य के क्षेत्र में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका 

विक्रमशिला सेतु बनने से पहले इलाज के लिए मायागंज मेडिकल कॉलेज जाना गंभीर रोगियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं था. लोग पूर्णियां, खगड़िया, बेगुसराय जाना ज्यादा पसंद करते थे. ऐसे में ज्यादा दूरी की वजह से लोगों की मृत्यु हो जाती थी. लेकिन आज का समय ऐसा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो नवगछिया के किसी भी इलाके से एक से डेढ़ घंटे में उसे मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है. 
उच्च शिक्षा थी चुनौती 

सेतु बनने से पहले उच्च शिक्षा एक चुनौती थी लेकिन आज के समय में ऐसे भी छात्र हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भागलपुर के अच्छे संस्थान से करते हैं तो कई छात्र साइकिल, मोटरसाइकिल, ऑटो, बस आदि से रोज भागलपुर जा कर एमए, लॉ आदि पाठ्यक्रम को पूरा कर रहे हैं. खास कर खरीक, इस्माइलपुर, नवगछिया के ग्रामीण क्षेत्रों और दियारा इलाके की बड़ी संख्या में लड़कियों को रोजाना साइकिल से भागलपुर पढ़ाई के लिए जाते और आते देखा जा सकता है. 
1.
आज में स्टीमर की उस यात्रा को याद कर सिहर उठते हैं 

आजाद हिंद मोरचा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि यह बात वर्ष 1995 के अगस्त माह की बात है. वे बेहद जरूरी काम से भागलपुर निकले थे. गंगा पूरी तरह से लबालब थी और ओर छोड़ भी मुश्किल से नजर आ रहा था. ऐसी स्थिति में वे अपने कुछ दोस्तों के साथ सुबह छ: बजे स्टीमर पर सवार हुए थे. उस समय सावन भादो के माह में गंगा को पार करने में स्टीम को तीन घंटे का वक्ता लग जाता था. लेकिन लगभग एक घंटे बाद ही स्टीमर का इंजन फेल हो गया. स्टीमर नदी के धारों के हवाले हो गया. कभी बायें जा रहा था कभी दायें, कभी सौ मीटर आगे तो कभी पांच सौ मीटर पीछे. स्टीमर पर करीब डेढ़ सौ से दो सौ लोग सवार होंगे लेकिन पूरी तरह से सन्नाटा था. लोग डूब कर मरने के डर से बार बार बेहोश हो रहे थे. कई लोगों ने भगवान को मोटी रकम, भैंसे और बकरे की बली की मनौती रख ली थी. जब शाम सात बज गये तो भूखे प्यासे लोगों ने जीवन की इच्छा छोड़ दी थी. कई लोग राम राम, उ नम: शिवाय का जाप कर रहे थे. तभी दूर अंधेरे में दूसरे स्टीमर की रौशनी दिखायी दी तो लोगों को हौसला मिला और जोर जोर से हल्ला करना शुरू किया. दूसरा स्टीमर धीरे धीरे करीब आने लगा और अंतत: जब एक दम करीब आ गया तो दोनों के मल्लाह यानी चालक ने दोनों स्टीमर को जोड़ दिया. अब चालक दल के सदस्यों ने तय किया कि वे लोग बरारी घाट नहीं जायेंगे बल्कि जो भी करीबी घाट होगा वहां पर स्टीमर को लगा कर लोगों को उतार दिया जायेगा. लगभग तीन घंटे बाद लगभग दस बजे रात को इंजिनयरिंग कॉलेज के पीछे स्टीमर तट पर खड़ा हुआ और लोगों की जान बच गयी. राजेंद्र यादव ने कहा कि जब भी उस घटना को याद करता हूं तो शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है. 
2.
इनकी यादों में है बीस वर्ष पहले की दिक्कतें 

अंगिका के ध्वनिवैज्ञानिक साहित्यकार डा रमेश मोहन शर्मा आत्मविश्वास ने कहा कि पुल बनने के बाद यहां की जिंदगी तेजी से बदल गयी है. संपन्न्ता तो आयी लेकिन जिंदगी की मौलिकता और स्वभाविकता गायब हो गयी. लेकिन यह तो होना ही था. सेतु बनने के बाद नवगछिया व्यापार का हब बन गया. आज के समय में गंगा पार में कोई भी व्यक्ति हो अगर वह कमाना चाह रहा है तो पूंजी और सांसाधन कोई मायने नहीं रखता. वह आसानी से कमाई कर रहा है. सेतु बनने के बाद साहित्यकारों के बीच आपसी समन्वय आसान हुआ है जिससे खास कर आंचलिक साहित्य दिनों दिन समृद्ध हो रहा है. 
3.
गये थे बारात, आज भी वह दिन याद है
सेतु बनने के बाद विक्रमशिला सेतु के सौ मीटर दूर से जाह्नवी बिहार कॉलोनी के रूप में एक मुहल्ला विकसित हो गया है. यहीं के निवासी गंगोत्री जागरण मंच् के राष्ट्रीय अध्यक्ष जदयू नेता गुलशन कुमार ने कहा कि आज से करीब 29 वर्ष पहले उनकी शादी हुई थी. यहां से बारात पिरपैंती के लिए रवाना हुई थी. बारात का संस्मरण कहते कहते गुलशन रोमांचित हो जाते हैं. वे बताते हैं पहले वे लोग ब्रह्म बाबा स्थल के पास रेलगाड़ी जिससे घाट गाड़ी कहा जाता था, उस पर सवार हुए और वहां से हाइलेवल जहाज घाट पहुंचे. वहां बड़े से जहाज पर सवार हुए और बारारी पहुंचे फिर पिरपैंती के लिए रवाना हुए थे. जो भी लोग उनके साथ गये थे आज भी उस बारात को याद कर रोमांचित हो जाते हैं. गुलशन कहते हैं कि उस समय ससुराल जाने के सोचना पड़ता था क्योंकि एक दिन तो जाने में ही लग जाता था. लेकिन आज कभी कभी एक दिन में वे दो बार अपने ससुराल से हो आते हैं. वास्तव में सेतु ने यहां के लोगों की जिंदगी को साकारात्मक तरीके से बदल दिया है. 
4.
नवगछिया बाजार के संतोष गुप्ता कहते हैं कि विक्रमशिला पुल के पहले भागलपुर जाना एक कठिन परीक्षा की थी. नवगछिया से भेड़ बकरी की तरह खचाखच भरी जीत औ बालू के रेल पर पैदल अपने लगेज के साथ स्टीमर पर जल्दी पहुंचने की जद्दोजहद और फिर स्टीमर पर चढ़ कर उस पार पहुंचना चांद को छूने जैसा प्रतीत होता था. उस पार में ऑटो शहर पहुंच कर अपने कार्य में थोड़ी भी देरी हो जाय तो पुन: नवगछिया पहुंचना मुश्किल. विक्रमशिला नवगछिया के लाइफ लाइन साबित हुआ. जिसने बुरे दिनों को हमेशा के लिए भुला दिया है. 
5.
खेल गुरू और ताइक्वांडो संघ के जिला महासचिव घनश्याम प्रसाद ने कहा कि एक बार वे लोग क्रिक्रेट खेलने पूरी टीम के साथ भागलपुर गये थे. उनलोगों ने मैच जीत लिया और वहां से खुश हो कर वापस घर आ रहे थे. बरारी पहुंचने पर पता चला कि अभी तुरंत आज का अंतिम स्टीमर खुल चुकी है. उनलोगों ने देखा कि महज तीन मीटर दूर ही स्टीमर है. वे लोग चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते थे. अब रात कहां ठहरें या समस्या थी. कुछ खिलाड़ियों के संबंधी भागलपुर में ही थे. लेकिन पूरी टीम के साथ किसी संबंधी के यहां जाना अच्छा नहीं लग रहा था. क्योंकि बीस लोगों के लिए तुरंत भोजन की व्यवस्था करना किसी के मत्थे मढ़ देना भी अच्छा नहीं लग रहा था. अंतत: एक खिलाड़ी के संबंधी ने पूरी टीम को घाट पर खड़े देख लिया. फिर उन्होंने सबों को अपने घर ले कर गये. उनके घर में एक बड़ा हॉल था. उनलोगों के लिए बाकायदा खाने पीने और सोने का इंतजाम किया गया. वे लोग फिर अगली सुबह घर के लिए रवाना हुए थे.
विक्रमशिला सेतु के 10 फायदे

1. यातायात के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव, इस पार और उसपार की घटी दूरियां, दिन भर का सफर अब महज चंद मिनटों में, कोसी और सीमांचल से भी जुड़ गया मध्य बिहार. 

2. नवगछिया के कई इलाके विकास की मुख्यधारा से जुड़े. जमीनें हुई महंगी, स्थापित हो गए नए बाज़ार, लाइन ढाबों और आलीशान होटलों से नवगछिया हुआ गुलजार. 

3. स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी आया आमूलचूल बदलाव, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को होने लगी मॉनिटरिंग, गंभीर रोगियों के एम्बुलेंस सीधे पहुंच रहे मेडिकल कॉलेज अस्पताल। सक्षम लोग शहर के निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में करवा पा रहे हैं इलाज. 

4. हुई श्वेतक्रान्ति, दुग्ध उत्पादन करना हो गया एक व्यवसाय, कई लोग रोजगार से जुड़े. 

5. सब्जी, केला, आम, लीची को भी मिला पहले से बेहतर बाजार. छोटे किसान सीधे पहुंच जाते हैं अपने उत्पाद के साथ बाजार
6. शिक्षा के क्षेत्र में भी छलांग, अब भागलपुर साइकिल से पढ़ने जाती है बिटिया, उच्च शिक्षा की भी हो रही विवि से प्रॉपर मॉनिटरिंग, सुधरे हालात

7. पूर्णियां के बाद मक्के का बड़ा बाजार बन गया नवगछिया. किसान व व्यवसायी आसानी से कर पा रहे हैं खरीद बिक्री. 

8. तरह तरह के रोजगारों का हुआ सृजन, मेहनत मजदूरी करने वाले आसानी से कर रहे हैं कमाई. 

9. सुधरे प्रशासनिक हालात, योजनाओं को क्रियान्वित करना हुआ आसान, अब हर गांव पर नजर रख सकता है जिला प्रशासन

10. सांस्कृतिक, साहित्यिक, लोकतात्विक बदलाव भी हुए, लोकगीत और लोककला में भी आया बदलाव.
ध्यान देने लायक बातें


1. जाम को नियंत्रित करने के लिये बनानी होगी ठोस रणनीति, भागलपुर और नवगछिया पुलिस को रखना होगा बेहतर सामंजस्य. 

2. सेतु पर वन वे परिचालन को सख्ती करना होगा लागू, पर्याप्त पुलिसकर्मियों की करनी होगी तैनाती. 

3. पुल पर एकाएक खराब हुए वाहनों को तुरंत हटाने के लिये करनी होगी क्रेन या किरान की व्यवस्था.

4. सेतु पथ पर जाम ना लगे इसके लिये ब्रांच सड़कों को भी सुदृढ़ कर उसे बेहतर उपयोग में लाया जा सकता है. 

5. हादसों से निपटने के लिये वाहनों की गति सीमा का हो सख्त निगरानी.

धूमधाम से संपन्न हुआ मधुश्रावणी, टेमी दागकर ली गई नववविवाहिताओं के सहनशील होने की परीक्षा GS NEWS


कोरोना महामारी के बीच मिथिलांचल का 14 दिवसीय मधुश्रावणी पर्व नवविवाहिताओं के बीच टेमी दागकर संपन्न हुआ। क्षेत्र की सभी नवविवाहिताओं ने सावन मास के पहले पक्ष से ही लगातर 14 दिनों तक मधुश्रावणी व्रत रखकर भगवान शंकर-पार्वती की पूजा-अर्चना की। यह व्रत अलग-अलग गांव में अनोखा व अद्भुत देखने को मिल रहा था।
इस पूजा की खास बात यह होती है कि इसमें महिला ही पंडित की भूमिका में होतीं हैं, जो नवविवाहिता के बीच कथा एवं पूजा विधिपूर्वक संपन्न करातीं हैं। नवविवाहिता के पैरों में जलते दीप का टेमी दागकर संपन्न कराया जाता है। यह परंपरा मिथिलांचल में वर्षों से चली आ रही है।
ससुराल से आए हुए सभी गहने-कपड़े में सजधज कर मैथिली लोकगीत गाकर भगवान शिव-पार्वती के साथ-साथ नाग-नागिन की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान महिला पंडिताइन कथा वाचन करतीं हैं। पूजा समाप्ति के बाद महिलाएं ससुराल से आए हुए भोजन को ग्रहण करतीं हैं।
महिलाओं ने बताया कि यह पर्व नवविवाहिता के लिए मधुमास माना जाता है। यह व्रत ससुराल से दिए गए सामानों के साथ ही संपन्न होता है। 14 दिनों तक नवविवाहिता अपनी सहेलियों के साथ गांव-गांव जाकर बगीचे से फूल-पौधों की पत्तियां तोड़ती हैं और अगले दिन उस बासी फूल-पत्ती से भगवान गौरीशंकर की पूजा-अर्चना की जाती है।

पीपीई किट पहन के NMCH पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, हालात का किया जायजा GS NEWS

बिहार में कोरोना ने हाहाकार मचा दिया है.संक्रमण की रफ़्तार इतनी ज्यादा है कि अब सरकारी अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं हैं. निजी अस्पतालों में कोरोना के ईलाज का आदेश बिहार सरकार ने दे रखा है लेकिन इसके लिए निजी अस्पताल तैयार नहीं दिख रहे हैं. जो निजी अस्पताल ईलाज करना भी चाहते हैं, उनके डॉक्टर्स सहयोग करने को तैयार नहीं हैं.मरीज ईलाज के लिए इधर उधर भटक रहे हैं. अस्पतालों से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो  दिल दहला देने वाली  तस्वीरें हैं 

इसी बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय गुरुवार को एमएमसीएच पहुंचे, जहां उन्होंने वहां की व्यवस्था का जायजा लिया। मंगल पांडेय पीपीई किट पहनकर एनएमसीएच के कोविड वार्ड में भी गएं। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने घूम-घूम कर स्थिति का जायजा लिया और वहां मरीजों से अस्पताल की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। मंगल पांडे ने वहां भर्ती मरीजों से इलाज में हो रही परेशानियों के बारे में भी जाना। 
स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेने के बाद मंगल पांडेय ने कहा कि अस्पताल के सभी 11 वार्डो में प्रभारी को इलाज की जिम्मेवारी दी गई है। एनएमसीएच में तीन दिनों में हेल्प डेस्क बनाने का निर्देश स्वास्थ्य मंत्री ने दिया है। हेल्प डेस्क के माध्यम से मरीज के परिजन को उनके मरीज के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाएगी। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों को हेल्प डेस्क से माध्यम से सहायता की जाएगी। साथ ही मंगल पांडेय ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना की थोड़ी सी भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत पास के जांच केन्द्र जाएं। निर्धारित जांच केन्द्र पर नि:शुल्क जांच की व्यवस्था की गई है। एक से आधे घंटे में रिपोर्ट मिल जाएगी।
स्वास्थ्य संविदाकर्मियों की हड़ताल से कोरोना मरीजों की परेशानी बढ़ी
बिहार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदाकर्मियों की हड़ताल से कोरोना मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। फार्मासिस्ट, एएनएम, प्रबंधन से जुड़े कर्मी सहित सभी संविदाकर्मी 21 जुलाई से हड़ताल पर चले गए हैं। सैम्पल एकत्र करने, पीपीई किट इत्यादि के वितरण सहित सामान्य मरीजों को भी इलाज में परेशनी हो रही है।
हड़ताल के कारण राज्य स्वास्थ्य समिति से प्रखंड तक कामकाज प्रभावित हुआ है। वहीं स्वास्थ्य विभाग इन्हें प्रोत्साहन राशि देने को तैयार है। इसके अलावा मानदेय में बढ़ोतरी, सेवा को स्थायी करने सहित अन्य मांगों पर सरकार विचार कर रही है।

एनएमसीएच-पीएमसीएच के हर कोविड वार्ड में डॉक्टरों की डेडिकेटेड टीम
एनएमसीएच और पीएमसीएच के हर कोविड वार्ड में चिकित्सकों की डेडीकेटेड टीम तैनात कर दी गई है। 24 घंटे टीम की वार्डों में तैनाती रहेगी। एक टीम से लगातार चार से छह घंटे काम लिए जाएंगे। ताकि टीम और अच्छे से काम कर सके। दोनों संस्थानों में बेहतर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। ताकि मरीजों के इलाज में कहीं से कोई कोताही नहीं हो। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर इलाज की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने को कई कदम उठाए गए हैं। इसी तर्ज पर राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है।

अभी अभी बिहार में मिलें कोरोना के 1625 नए मरीज, राज्य में आंकड़ा पहुंचा 31691 GS NEWS

बिहार में वैश्विक महामारी कोरोना का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ते जा रहा है देखते ही देखते पूरा जिला इसकी चपेट में आ चुका है प्रत्येक माह से सैकड़ों की तादात में मरीज की टीम के सामने आ रही है स्वास्थ्य  विभाग की ओर से ताजा अपडेट जारी की गई है. इस अपडेट के मुताबिक बिहार में 1625 लोग कोरोना पॉजिटव मिले हैं. इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 31691 हो गई है.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार राजधानी पटना में कोरोना कंट्रोल से बाहर होते जा रहा है. सिर्फ पटना में कोरोना के आज 307 नए मरीज मिले हैं. यहां पर कोरोना कंट्रोल नहींं हो पा रहा है. रोज नए मरीज मिले रहे हैं. इसके अलावे गया में भी कोरोना के संक्रमण तेजी से फैल रहा है. आज गया में 119 नए मरीज मिले हैं.
भागलपुर में 83, बक्सर में 62, नवादा में भी तेजी से कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है. आज के आंकड़े के अनुसार नवादा में 130 नए मरीज मिले हैं. रोहतास में भी लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है यहां पर 105 मरीज मिले हैं. जहानाबाद में 75 मरीज मिले हैं. सारण में 98 मरीज मिले हैं.
22 जुलाई को अब तक 717 नए मामले सामने आए
21 जुलाई और उससे पहले के 908 मामले सामने आए

RJD नेता के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया शोक GS NEWS


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दानापुर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन और दानापुर विधानसभा से राजद के प्रत्याशी रह चुके राजकिशोर यादव के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. सीएम ने अपने शोक संदेश में कहा कि राज किशोर यादव एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता थे. उनके निधन से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अतुलनीय क्षति हुई है.

सीएम ने राजकिशोर के निधन पर जताया शोक
मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति और उनके परिजनों के दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की. राजद के वरिष्ठ नेता राज किशोर यादव की पिछले दिनों कोरोना से मौत हो गई थी. 

उनकी मौत की खबर सुनते ही परिवार सहित पार्टी में मातम का माहौल हो गया था. बता दें कि राजकिशोर यादव दानापुर से राजद के पूर्व प्रत्याशी और दानापुर नगर परिषद के चेयरमैन रहे थे.
एम्स में हुई थी मौत 
बता दें कि राजकिशोर यादव 17 तारीख को ही कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती हुए थे, जहां उनका इलाज चल रहा था. कोरोना संक्रमण से पीड़ित राज किशोर यादव की मौत एम्स में इलाज के दौरान हो गई थी. राज किशोर यादव, लालू यादव के करीबी नेताओं में शुमार थे. राज किशोर यादव दानापुर नगर परिषद के कई बार चेयरमैन भी रहे थे. इतना ही नहीं राजद ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राजकिशोर यादव को दानापुर से अपना प्रत्याशी भी बनाया था.